Monday, March 17, 2014

कोने का महत्त्व

जीवन में कोने का बहुत बड़ा महत्त्व है।  अनेक समस्याएं मात्र कोने में जाने से संभल जाती हैं।  किसी से कोई झगड़ा है , सबके सामने नहीं कोने में बैठकर सुलझा लो। कोई नहीं देखेगा क्या हुआ।  किसी को गोपनीय मन्त्र देना ,है कोने में ले जाओ। किसी से बैर है, उसे  कोने में लगा दो।गुस्सा हो, कोने में बैठ जाओ।  लोगों से शर्म आती है कोने में चले जाओ। किसी को तिरस्कृत करना ,हो कोने में बैठा दो। कोने में बड़े बड़े मामले हल हो जाते है।  कुछ परिस्थितियों में कोना पकड़ना हितकर होता है तो कुछ में अहितकर भी हो जाता है।  दरअसल असली लड़ाई केंद्र और कोने की है। कोना में लगा व्यक्ति  केंद्र की तरफ भागना चाहता है  जबकि केंद्र पर पहले से मौजूद उसे पुनः कोने की ओर ठेलता है। घर से लेकर परिवार , परिवार से समाज , समाज से देश एवं विदेश सभी जगह केंद्र-कोना विवाद कायम है। कोना किसी स्थान का वह हिस्सा है जहाँ दो दीवालें मिलती हैं/अलग-अलग होती हैं।  कोने में दिल मिल भी सकते है, बिछड़ भी सकते हैं।  

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