डिग्री शिक्षकों के प्रदेश संगठन का बुरा हाल है. दिनांक ९ सितम्बर को पी पी एन कालेज में हुई बैठक इस बात का सबूत है. अध्यक्ष महोदय रिटायर होने के बाद भी पद का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं. गुटबंदी की ऐसी सीमा पहली बार देखने को मिली. शोर शराबे हंगामे के बाद बैठक बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गयी. समझ में नहीं आ रहा समाज को शिक्षित करने दंभ भरने वाले वाले इस तबके से जुड़े लोग स्वयं को कब शिक्षित कर पायेगे? शिक्षक नेता लगता है अब मात्र नेता ही रह जायेगे. शिक्षकत्व का लोप हो रहा है. मर्यादाएं लांघी जा रही हैं. एक बड़े बदलाव की आवश्यकता है , अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब सम्मान तो भूल जाईये शिक्षक समाज की आवाज कोई सुनने वाला नहीं होगा. मंच से बड़ी बड़ी बाते करने से कुछ नहीं होने वाला. अपने से बाहर निकलने की जरूरत है.
Saturday, September 14, 2013
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