Sunday, May 22, 2011
शमशान में भी सावधान
आज समिति के एक वयोवृद्ध सदस्य के निधन पर भैरोंघाट जान पड़ा. घाट पर कर पार्किंग से कुछ कदम पर लकड़ी के टाल हैं जहाँ से लोग लकड़ी खरीद कर चिता स्थल तक ले जाते हैं. कार से मोबाइल हाथ में ले उतरकर टाल तक जाने में लगभग ३०-४० मीटर की दूरी तय करने के दौरान मोबाईल कुरते की जेब में रख कर लकड़ी तौले जाने का इन्तजार किया और तुल जाने के बाद एक लट्ठा उठाकर चलने को हुआ तो अकस्मात् जेब जिसमे मोबाइल रखा था पर हाथ पड़ा. मोबाइल गायब. इधर उधर देखा कुछ समझ में न आया. वापस कार तक गया भ्रम मिटाने. कुल मिलाकर यह निश्चित हो गया की मोबाइल किसी नें पार कर दिया है. अब चिंतन की बारी थी. घाट पर जलती हुई चिताओं की ओर देखता हुआ सोच रहा था कि शमशान में जाने वालों को तो दुनिया से छणिक विरक्ति शायद हो जाती हो पर शमशान घाट पर ही अपना गुजर बसर करने वालों को बिलकुल भी नहीं. ध्यान से अगर देखें तो लकड़ी बेचने वाले, अंतिम संस्कार कराने वाले पंडे, चिता लगाने वाले, घाट के ऊपर चाय वाले,पान वाले , मिठाई वाले सभी अपने अपने काम में उसी तरह व्यस्त हैं जैसे अन्य कोई जो उस जगह से दूर है. हर प्रकार के प्राणी हर जगह है. चोर,उचक्के, उठाईगीर शमशान पर भी मौजूद हैं. बिजनेस हर जगह चल रहा है. खैर मोबाइल तो जिस दिन खरीदा था उसी दिन से उसे खोने की सम्भावना उत्पन्न कर ली थी. पर समझ में आया कि सावधान रहो हर जगह, शमशान में भी.
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