Sunday, April 4, 2010

आदमी-प्रकार

आदमी दो तरह के होते हैं , एक वो जो स्वतः संचलित होकर ठीक रहते हैं । दूसरे वो जो भय एवं दबाव में ठीक रहते हैं । एक वे होते हैं जो आपके लाभ एवं हानि दोनों में बराबर के साझीदार बनते हैं ; दूसरे वे जो केवल आपके लाभ में साझीदार बनते हैं और आपके साथ अपनी हानि की संभावना में बहुत दिन तक आपके साथ नहीं टिक पाते और कोई न कोई बहाना बना कर किनारे हो लेते हैं। सही साथी वही है जो स्वतः संचालित ठीक है, जो आपके साथ हानि लाभ की परवाह किये बिना जुडा हुआ है। भय, दबाव में ठीक रहने वाले, मात्र आपके लाभ ( यानी पद , प्रतिष्ठा, पैसा, प्रसिद्धी आदि ) बांटने वाले लोगों से उचित दूरी बनाये रखने में ही भलाई है अन्यथा वे कष्ट के कारण बनते हैं।